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Shri Madbhagwata Maha Purana

 श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रथम खण्ड (प्रथम स्कंध) पूरे भागवत जी की नींव है। इसमें कुल 19 अध्याय हैं, जिनमें यह बताया गया है कि इस महापुराण की रचना क्यों और किन परिस्थितियों में हुई, और इसका क्या महत्व है। ​यहाँ प्रथम खण्ड की कथा का सार सरल हिंदी देवनागरी लिपि में दिया गया है: ​1. नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों के प्रश्न ​कथा की शुरुआत नैमिषारण्य तीर्थ से होती है। वहाँ शौनकादि 88,000 ऋषि-मुनि मानव कल्याण के लिए एक विशाल महायज्ञ कर रहे होते हैं। उसी समय वहाँ परम विद्वान सूत जी का आगमन होता है। ​ऋषिगण उनसे मानव कल्याण के लिए 6 मुख्य प्रश्न पूछते हैं: ​मानव जाति के लिए सबसे बड़ा कल्याणकारी मार्ग क्या है? ​समस्त शास्त्रों का सार (निचोड़) क्या है? ​भगवान ने देवकी के गर्भ से जन्म क्यों लिया? ​भगवान के अलग-अलग अवतार कौन से हैं? ​भगवान जब अपने परम धाम (वैकुंठ) लौट गए, तब धर्म ने किसकी शरण ली?

Om Namho Bhagwate Vasudevay Namha

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श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम् विनियोग: अस्य श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य, श्रीवेदव्यास ऋषयः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहाविष्णुर्देवता, अमृतांशूद्भवो भानुरिति बीजम्, देवकीनन्दनः स्रष्टेति शक्तिः, उद्भवः क्षोभणो देव इति परमो मन्त्रः, शङ्खभृन्नन्दकी चक्रीति कीलकम्, शार्ङ्गधन्वा गदाधर इत्यस्त्रम्, रथाङ्गपाणिरक्षोभ्य इति नेत्रम्, त्रिसामा सामगः साम निर्वाणं भेषजं तथा, धर्मं धर्मविदाम श्रेष्ठ इति धर्मः, विश्वरेव सदाह्लाद इत्यत्र मन्त्रः, श्रीमहाविष्णुप्रसादसिद्ध्यर्थे विनियोगः। ध्यानम्: क्षीरोदन्वत्प्रदेशे शुचिमणिविलसत् सैकते मौक्तिकानां मालाक्लृप्तासनस्थः स्फटिकमणिनिभैर्मौक्तिकैर्मण्डिताङ्गः। शुभ्रैरभ्रैरदाभैरुपरिविरचितैर्मुक्तपीयूषवर्षैः आनन्दी नः पुनीयादरिनलिनगदाशङ्खपाणिर्मुकुन्दः॥ सहस्त्रनाम स्तोत्र (मुख्य भाग) १. विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥ २. पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः। अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥ ३. योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः। नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः॥ ४. सर्व...